आसमाई की पूजा(Aasmaai ka Poojan

आसमाई की पूजा(Aasmaai ka Poojan) 




कथा :-एक राजा के एकलौता तथा बड़ा ही उपद्रवी
राजकुमार था। माँ-बाप को प्यार होने के कारण वह मनमानी
कार्य करता था। वह प्रायः पनघटों पर बैठकर पनिहारियों की
गागरी गुलेल से फोड़ डाला था। यह शिकायत राजा तक
पहुंची। उन्होंने यह आज्ञा निकाल दी कि मिट्टी का घड़ा लेकर
कोई पनघट पर न जाये। सभी स्त्रियां मान गयी तथा वे पीतल
व तांबे के घड़े में जल भरने लगी। इसके पश्चात् उस राजकुमार
ने लोहे तथा शीशे के घरों से घड़ा फोड़ने की क्रिया पूर्ववत् ।
चालू कर दी। फिर शिकायती लोग राजा के पास गये। राजा
बहुत क्रोधित हुए तथा अपने पुत्र को देश निकाला' की आज्ञा
दे दी। आज्ञा पाते ही राजकुमार घोड़ा दौड़ाता वन की ओर
चल दिया। थोड़ा आगे बढ़ने पर ४ बुढ़िया से उसकी भेंट हुई।
अचानक राजकुमार का चाबुक गिर गया। उसने उतरकर
उठाया था फिर आगे बढ़ा। बुढ़िया ने समझा, मुझे प्रणाम
किया गया है। मगर नजदीक पहुंचने पर जब वे चारों प्रणाम
चौथी बुढ़िया (आसमांई) को अपना किया गया प्रणाम बताता
की वास्तविकता पूछती है तो राजकुमार तीन को इनकार कर
है। राजकुमार कींं बातों पर आसमाई बहुत प्रसन्न हुई तथा
चार कौड़ियां देकर आशीर्वाद दिया कि जब तक ये कौड़ियां
तुम्हारे पास रहेंगी; तुमसे कोई नहीं जीत सकेगा। समस्त कार्यों
में तुम्हें सफलता मिलेगी। चाहे वह युद्ध हो अथवा धूत विद्या।
देवी का आशीर्वाद लेकर राजकुमार वहां से चल दिया।
देश देशान्तर का भ्रमण करते हुए वह एक राजधानी में
पहुँच गया। वहां का राजा जुआ खेलने में अति पारङ्गत था।
प्रजा जन भी इस विद्या से काफी परिचित थे। राजकुमार पहले
तो घाट पर एक धोबी को देवी द्वारा दिये गए कौड़ियों के बल
से जुये में हराता है, जो कि राजदरबार में जाकर इसकी
उद्यत होता है तथा सब राजपाट हार जाता है। फिर बढे मंत्री
प्रशंसा करता है। यह सुनकर वह राजा भी जुआ खेलने को
की सलाह से वहा राजा अपनी पुत्री का विवाह इस चूत विजेता
राजकुमार के साथ कर देता है, इस प्रकार दोनों महलों का
सुख भोगने लगते हैं। राजकुमारी बहुत ही शीलवान तथा
सदाचारिणी थी।
महल में सास-ननद के अभाव में वह कपड़े की गुड़ियों
द्वारा सास-नन्द की परिकल्पना करके उनके चरण को आंचल
पसार कर छूती तथा आशीर्वाद लेने लगी।
एक दिन अकस्मात् राजकुमार ने यह सब देख लिया
और पूछा 'यह तुम क्या करती हो ?' राजकुमारी ने बताया
कि स्त्रियोचित धर्म का पालन करती हूं। यदि मैं आपके घर में
प्रतीक स्वरूप ही धर्म का पालन कर रही हूं। रानी की ऐसी
होती तो मुझे प्रत्यक्ष सास-ननद के दर्शन होते, परन्तु यहां
उत्कट इच्छा जानकर राजकुमार सेना सहित घर जाने को तैयार हो गया।
 जब नई नवेली के साथ राजकुमार पिता की
राजधानी को पहुंचता है, तो वियोग के कारण निरन्तर रोने से
अपने माँ-बाप को नेत्र विहीन पाता है। पुत्र का समाचार पाते
ही राजा-रानी अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। तथा कुल मर्यादा के
अनुसार वर-वधू को महल में प्रवेश करते ही बहू सास के
चरण छूती है। सास के आशीर्वाद से कुछ दिन बाद ही एक
सुन्दर बालक का जन्म होता है। इसी बीच मां बाप को अमर
ज्योति मिलती है। आसमाई की कृपा से उनका सारा दुःख दूर
हो जाता है।

ShayriKiDairy

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