दुबडी़ सातें की कहनी(doobri sate ki kahani)

दुबडी़ सातें की कहनी  (doobri sate ki kahani)





कथा एक साहूकार था उसके सात बेटे थे। जब वह अपने किसी बेटे का विवाह करता उसी समय उसका बेटा मर जाता था। इस प्रकार उसके छ: बेटे मर चुके थे। सबसे छोटा बेटा बाकी था। एक दिन की बात है कि छोटे बेटे के विवाह की बात चली, शादी तय हो गई। रिश्तेदारों को न्योते भी भेज दिए। गए। जब इस लड़के की बुआ आ रही थी तो उसे रास्ते में एक बुढ़िया मिली वह चक्की से आटा पीस रही थी। वहां लड़के की बुआ बैठ गई और बुढ़िया के पांव लगी। बुढ़िया बोली बेटी ने बेटी। तू कहां जा रही है? तब उसने सब हाल कह सुनाया। बुढ़िया बोली-वह तो घर से निकलने पर दरवाजे से दबकर मर जायेगा। अगर वहां से भी बच गया तो रास्ते में बारात रुकेगी वहां पेड़ गिर जायेगा, अगर वहां से बच गया तो ससुराल में । दरवाजा गिरने पर दब कर मर जायेगा अगर वहां भी न मरा तो सातवें भॉवर पर सर्प काट लेगा और वह मर जायेगा। यह बात सुनकर लड़के की बुआ कहने लगीं-माँ बचने का कोई उपाय है तब बुढ़िया बोली है तो सही परन्तु कठिन है। सुन, उस लड़के को पीछे की दीवाल फोड कर निकालना, पेड के नीचे बारात न रुकने देना, ससुराल में भी पीछे से दरवाजा कराकर ले जाना। भाँवरों पर एक कटोरा दूध का भरकर रख आवे तो दूध पिला कर बांध देना, फिर सांपिन आवेगी और लेना और तांत का फांसा बनाकर रख देना, जब वह साँप वह सांप मांगेगी, तब तुम उससे अपने छः भतीजों को मांग लेना, वह उन्हें जीवित कर देगी। साथ में इस बात को किसी को सुनना मत, नहीं तो सुनाने वाले और सुनने वाले दोनों की मृत्यु हो जायेगी। फिर लड़का नहीं बच सकता। यह कह कर बुढ़िया जाने लगी और बोली मेरा नाम दुबड़ी है। यह सुनकर बुआ घर आई। जब बारात जाने लगी तब वह रास्ता रोक कर खड़ी हो गई और कहने लगी पीछे से दरवाजा बनाकर ले जाओ। तब पीछे से दरवाजे से लड़का निकला तो घर का पुराना दरवाजा गिर गया। तब सब कहने लगे की बुआ-ने तो अच्छा किया। जब बारात चलने लगी तो बुआ भी जाने को बोली सबने मना किया कि औरते बारात में नहीं
जाते पर वह नहीं मानी और बारात के साथ-साथ चल दी।
रास्ते में जब बारात पेड़ के नीचे रुकने लगी तो उसने मना
किया  और दुल्हा को वहां न बैठाकर धूप में बैठाया। दूल्हा के
बैठते ही पेड़ गिर गया। इस बात को देखकर सब बुआ की
बडा़ई करने लगे। जब बारात वहां से चलकर ससुराल में पहुंची
तो वहां भी पीछे के दरवाजे से जाने को कहा और उसकी बात
सुबने मान लो पीछे के दरवाजे से जैसे ही लड़का घर में घुसा
दरवाजा गिर गया। तब सब कहने लगे कि यह बात बुआ को
किस प्रकार पत दली। जब भाँवरें पड़ने लगी तो उसने एक
कटरा इच्चा दूध मंगाया और तांत का फांसा बनाकर रख
लिया। जब सातवीं भाँवर पड़ने लगों। तभी सर्प आया बुआ ने
सांप के सामने दुध कर दिया। दूध पीते समय साँप को उसने
तांत से बांध लिया। तब बाद में सापिन आई और उसने अपना
सांप मांगा। तब लड़के की बुआ ने अपने छहों भतीजे मांगे।
सांपिन ने उसके छहों भतीजे जीवित कर दिये और सांप को
साथ लेकर चली गई इस प्रकार उसे सातों भतीजे मिल गये।
बारान घर वापिस आई तब लड़के की बुआ ने सप्तमी के दिन
दु़बडी पूजा कराई। इसी से इसको दुबडी सातें कहते हैं।
दुबड़ी मैया। जैसे तैने बुआ को सातों भतीजे दिये वैसे सबको दीजिए।

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